वाराणसी के बुलानाला स्थित श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज के अपराजिता सभागार में शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रबंध प्रकाश’ सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। अहमदाबाद से पधारे प्रख्यात आचार्य गोस्वामी श्री रणछोड़ लाल जी ने ध्रुपद-धमार से पूर्व की प्राचीन प्रबंध गायन शैली और हवेली संगीत की ऐतिहासिक यात्रा प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- आचार्य जी ने रुद्र परंपरा (महादेव), नारद और वेदव्यास होते हुए वल्लभाचार्य काल (कीर्तन परंपरा व हवेली संगीत) के विकास क्रम को रेखांकित किया।
- प्रमुख प्रस्तुतियां:
- राग रामकली में संस्कृत रचना
- ब्रजभाषा में राग आभोगी में “रानी तेरो चिर जीवो गोपाल” और राग आसावरी
- समापन में राग सारंग के सातों प्रकारों पर स्वरचित रचना
- संगत कलाकार: नूपुर पारीख (पखावज), अर्पित माणवीय (सारंगी), पियूष जालोरा (झांझ), सौरभ कश्यप (तानपुरा)।
संगीत की प्राच्य धाराओं को जीवंत करने वाले इस आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। प्राचार्य प्रो. मिथिलेश सिंह ने स्वागत संबोधन देते हुए सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर दिया। संस्थान के अध्यक्ष श्री दीपक अग्रवाल और प्रबंधक डॉ. मधु अग्रवाल ने आशीर्वचन से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
मुख्य प्रस्तुति देते हुए आचार्य गोस्वामी श्री रणछोड़ लाल जी ने समझाया कि कैसे ईसवी पूर्व की उपासना और स्वर-साधना की धाराएं कालांतर में हवेली संगीत के रूप में परिणत हुईं। उनकी बंदिशों और शास्त्रीय मि मिजाज ने सभागार का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और शास्त्रीय बना दिया।
संगीत विभाग व सांस्कृतिक केंद्र की डॉ. अपर्णा शुक्ला और डॉ. वेणु वनिता के संयोजन में हुए इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीता दिसावाल ने किया। अंत में डॉ. वेणु वनिता ने सभी अतिथियों और कलाकारों के प्रति आभार ज्ञापित किया। महाविद्यालय के शिक्षक, संगीत साधक और बड़ी संख्या में छात्राएं इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनीं।















