लखनऊ/वाराणसी (DNA Republic): उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल के हितधारकों के लिए एक विशेष वेबिनार आयोजित किया। इस संवादात्मक जागरूकता कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के सैकड़ों गृह क्रेताओं, आवंटियों, बिल्डरों (प्रमोटरों) और पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने की। वाराणसी से मंडलायुक्त आईएएस एस. राजालिंगम तथा वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के उपाध्यक्ष आईएएस पूर्ण बोरा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
“जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित निवेश कर सकता है”
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए यूपी रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि रियल एस्टेट में सुरक्षित निवेश का सबसे मजबूत आधार उपभोक्ता की जागरूकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी रेरा का काम सिर्फ विवादों का निपटारा करना ही नहीं, बल्कि आम खरीदारों को उनके कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करना भी है। उन्होंने घर खरीदारों को सलाह दी कि केवल आकर्षक विज्ञापनों या ब्रोशर के आधार पर फैसला न लें, बल्कि निवेश से पहले यूपी रेरा के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर परियोजना का सत्यापन अवश्य करें।
निवेश से पहले इन 7 प्रमुख बातों की जांच अनिवार्य:
यूपी रेरा के प्रधान सलाहकार अबरार अहमद ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रेरा अधिनियम, 2016 के प्रमुख प्रावधानों को समझाया। उन्होंने खरीदारों को सलाह दी कि किसी भी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले निम्नलिखित बिंदुओं की जांच जरूर करें:
- रेरा पंजीकरण संख्या और वैधता (RERA Registration Number & Validity)
- स्वीकृत लेआउट और नक्शा (Sanctioned Layout Plan)
- भूमि का कानूनी स्वामित्व (Land Title & Ownership)
- प्रोजेक्ट का एस्क्रो/बैंक खाता (Designated Bank Account)
- प्रमोटर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड (Promoter’s Track Record)
- निर्माण की समय सीमा व प्रगति (Proposed Completion Timeline)
- एजेंट का रेरा पंजीकरण (Registered Real Estate Agent)
विवाद की स्थिति में कहां और कैसे करें शिकायत?
सत्र के दौरान बताया गया कि यदि कोई बिल्डर समय पर कब्जा नहीं देता, स्वीकृत नक्शे में बिना सहमति बदलाव करता है, अनुचित पैसों की मांग करता है या आवंटन रद्द करता है, तो आवंटी फॉर्म एम (Form M) या फॉर्म एन (Form N) के माध्यम से यूपी रेरा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A Session) आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों ने पजेशन, रजिस्ट्री, ब्याज और रिफंड से जुड़ी गृह क्रेताओं की शंकाओं का समाधान किया।















