वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बहुचर्चित अवैध एवं फर्जी दवा सिंडिकेट मामले में जिला अदालत से बड़ी खबर सामने आई है। अपर सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी. (14वां वित्त आयोग) मनोज कुमार द्वितीय की अदालत ने मामले के सह-अभियुक्त गौरव शर्मा (निवासी- गाय घाट, मच्छोदरी, थाना आदमपुर) की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
यह मामला थाना मण्डुवाडीह में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 277 और 278 के तहत दर्ज किया गया था।
क्या था पूरा मामला?
मुकदमे के अनुसार, 06 जुलाई 2026 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मुख्यालय, लखनऊ से मिली सूचना के आधार पर वाराणसी के औषधि निरीक्षक ने पुलिस टीम के साथ मण्डुवाडीह स्थित ‘चौधरी कटरा’ में छापेमारी की थी।
वहाँ ‘न्यू सर्जिकल’ नामक दुकान पर भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां पाई गईं। मौके पर मौजूद संदीप श्रीवास्तव दवाओं के क्रय-विक्रय या लाइसेंस से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ में उसने दावा किया कि वह ये दवाइयां प्रयागराज के संजय सिंह चौहान और वाराणसी के गौरव शर्मा से प्राप्त करता था।
अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें
गौरव शर्मा की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में पक्ष रखते हुए निम्नलिखित बिंदु उठाए:
- कोई सीधी बरामदगी नहीं: अभियुक्त गौरव शर्मा के पास से या उनके परिसर से कोई भी संदिग्ध दवा बरामद नहीं हुई है।
- कारोबार से संबंध नहीं: आवेदक का दवा व्यवसाय से कोई लेना-देना नहीं है; वह प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करता है। सह-अभियुक्त से उसकी बातचीत केवल प्रॉपर्टी के संदर्भ में हुई थी।
- FIR में विलंब: छापेमारी 06 जुलाई दोपहर को हुई, जबकि प्राथमिकी 07 जुलाई को दर्ज की गई।
- कानूनी प्रावधान: आरोपित अपराधों में अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है और मामला प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
अदालत का फैसला और शर्तें
अदालत ने पत्रावली के अवलोकन के बाद पाया कि गौरव शर्मा का नाम केवल सह-अभियुक्त के बयान के आधार पर प्रकाश में आया है और उनके पास से कोई बरामदगी नहीं दर्शाई गई है। साथ ही अभियोजन पक्ष द्वारा पेश आपराधिक इतिहास में पिता के नाम व पते को लेकर भिन्नता पाई गई।
मामले के तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने ₹30,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की जमानत पर अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली।
कोर्ट द्वारा लगाई गई मुख्य शर्तें:
- आरोपी आरोप विरचन एवं बयान दर्ज कराने के लिए तय तिथियों पर अदालत में उपस्थित रहेगा।
- गवाहों को डराने, धमकाने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा।
- बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के भारत से बाहर यात्रा नहीं करेगा।















